मेरी परछाईं तू!

मेरी परछाईं तू,
एक तेरे आने से 
अस्तित्व मेरा सम्पूर्ण

पल-पल भटकते
मानस को
मिली एक ठाँव विश्रान्ति की
मिला मुझे तेरे आने से
मेरे होने का भान प्रथम 

एक तू है
जहाँ सम्पूर्ण हूँ
हर उस पल,
जिस पल तू अंक में मेरी 
खेलता, करता बालपन

एक तू है
तो भान है
देव हूँ मैं
एक तेरे आने से पहले
लगा था
दैन्य हूँ मैं।

जो तू है
तो मैं हूँ
परछाईं से ही तो
भान है, देह का
जो तू है
तो मैं हूँ।

ऐ मेरी परछाई!

©देव

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