तुम नहीं जानते प्रेम क्या है!

तुम नहीं जानते प्रेम क्या है!

अधरों के चुम्बन को, 
शृङ्गो के मर्दन को
यदि प्रेम कहते हो!
तो नहीं जानते प्रेम क्या है!

अधरों में रस जिससे है
ये शृङ्ग उन्मत्त किससे है?
यदि जानते हो!
तो जान लोगे प्रेम क्या है!

दो देहों के मिलने को,
पाटलद्वय विहँसने को,
यदि प्रेम कहते हो!
तो नहीं जानते प्रेम क्या है!

देह ढूँढ रहे जिसे
पाटल श्रांत करे किसे?
यदि जानते हो!
तो जान लोगे प्रेम क्या है!

सात जन्मों का है सम्बन्ध
या तो इस जन्म का बन्ध
यदि इसे प्रेम कहते हो!
तो नहीं जानते प्रेम क्या है!

प्रेम है इस पल में होना
हम होकर मैं को खोना
यदि जानते हो!
तो जान लोगे प्रेम क्या है!

✍️देव

चित्र साभार गूूूगल से (बिसवाल भैया)

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