प्रपितामह व नात का सम्बंध!

प्रपितामह व नात का सम्बन्ध
जैसे सूद पर सूद का प्रबन्ध
एक लगाव अनकहा,
एक प्रेम हँसता हुआ

एक आस भविष्य की
अपने स्व के निकष की

जैसे वट की लटकती जटाएँ
जटाओं का वृक्ष बनना
स्वयं से सिंचित
स्वयं का अस्तित्व होना

प्रपितामह व नात का सम्बन्ध
जैसे हिम का नद बनना
टकटकी बाँधे आँखों में
जैसे स्व का खोना

हर हठ को पूरा करना
शक्य न हो, तो भी 
नन्हे पैरों से स्व का चलना
नात में स्व को निरखना

एक प्रपितामह व नात का सम्बंध
जैसे बूढ़े पंखों का फिरसे जगना
अनंत से अँधियारे में
जैसे सूर्य का उगना

चुप हो गए होठों का
जैसे फिरसे हँसना
धीमे होते स्पन्दों का
जैसे फिर से धड़कना

जैसे एक अन्धा कुंआ
और गिरते जाना
एक डोर का सम्बल
और सम्भलते जाना

प्रपितामह व नात का सम्बंध
आंखों में अनथक निरखना
एक आस का जगना
जो कभी न होगा
उस भविष्य को निरखना

भूत में हो यदि 
भविष्य का देखना
तो देखो हे सृष्टि!
प्रपितामह व नात का होना।

✍️देव

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