हाँ मैं हिन्दू हूँ!
हाँ मैं हिन्दू हूँ-
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खजुराहो के मंदिर सा टूटा पड़ा हूँ
हम्पी के अवशेषों सा लुटा पड़ा हूँ
वो गौरव, अभिमान, वो तुंग शिखर
हाँ मैं हिन्दू हूँ, भूमि पे गिरा पड़ा हूँ
मैं काशी का विश्वनाथ, ज्ञान का देवता हूँ
ज्ञानवापी के अँधियारे में घुटा पड़ा हूँ
लेके कोई विप्र मुझे कुँए में शेष पड़ा है
हाँ मैं हिन्दू हूँ, सदियों तक क्लेश सहा है
मैं विद्या की देवी सा भग्न खड़ा हूँ
शारदा के मठ का वो बुझा दिया हूँ
ओंकार की ध्वनि अजानों में जो उलझी
हाँ मैं हिन्दू हूँ, घाटी में मौन खड़ा हूँ
रघुनंदन के चरणों में जो पुष्प चढ़ा था
कोदण्ड कराल का शर बनके जो युद्ध लड़ा था
जिसने म्लेच्छ की महिमा का है ध्वंश किया
हाँ मैं हिन्दू हूँ, आज मैं षण्ढ पड़ा हूँ
जिसने पाण्डव संग कौरवी युद्ध लड़ा
जिसका पा आशीष धनंजय बाण बढ़ा
जिसने यमुना-नीर को विषहीन किया
हाँ मैं हिन्दू हूँ, उस कान्हे को भूल गया हूँ
हिंगलाज में बनके ज्योति जलता था जो
गर्देश-विनायक पे गर्वित हो नमता था जो
जिसने कासिम, गोरी की शमशीरें झेलीं
हाँ मैं हिन्दू हूँ, आज मैं पस्त पड़ा हूँ
परन्तु,
परन्तु भान रहे ये तुमको, मैं बप्पा रावल
जिसने चाँद सितारे को किया था घायल
अरब के ताप का जिसने क्षण में अंत किया था
हाँ मैं हिन्दू हूँ, तुम्हें निर्वंश किया था
राणा के भाले का मैं वो धार धुरंधर
वज्रपात सा बरसा जो, मैं वो पुरंदर
जिसने दूतों के मान को भङ्ग किया
हाँ मैं हिन्दू हूँ, मुगलों का ध्वंश किया
हाँ ये सत्य! बल-पवनपुत्र सा विस्मृत हूँ मैं
स्वयं के बल को भूल कहीं पर विस्मित हूँ मैं
परन्तु उठ के अवश्य मैं सिंहनाद करूँगा
ध्यान रहे हिन्दू हूँ, सर्वत्र म्लेच्छ का नाश करूँगा
✍️देव
चित्र गूगल से साभार
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