अब जाकर


अब जाकर खोई सब आशाएँ हमने
अब जाकर तुमको खोये हैं हम
अब जाकर आहिस्ता से छूटी जिंदगी
अब जाकर तन्हा हो रोये हैं हम

इस प्रेम डगर कुछ आस बचे जो
कुछ दो पग चल ले मरकर आदम
जो खो जाये मन से आस की ज्योति
तो किस ओर तके अँधेरे आदम


।।काफ़िर।।

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